Chhoti Diwali 2025 : दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक है। दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का भी विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
साल 2025 में छोटी दिवाली 20 अक्टूबर (सोमवार) के दिन मनाई जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।
Chhoti Diwali के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान करते हैं, दीप जलाते हैं और घर को सजाते हैं। माना जाता है कि इस दिन पवित्र स्नान और पूजा करने से पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Chhoti Diwali 2025: Chhoti diwali kab hai
Chhoti Diwali 2025 : दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक है। दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का भी विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
साल 2025 में छोटी दिवाली 20 अक्टूबर (सोमवार) के दिन मनाई जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।
छोटी दिवाली के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान करते हैं, दीप जलाते हैं और घर को सजाते हैं। माना जाता है कि इस दिन पवित्र स्नान और पूजा करने से पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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Chhoti Diwali की कहानी (नरकासुर वध)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर नामक एक दैत्य असुरों का राजा था जिसने स्वर्ग और पृथ्वी पर आतंक मचा रखा था। उसने कई देवियों और साधुओं को बंदी बना लिया था।
भगवान कृष्ण और माता सत्यभामा ने नरकासुर का वध करके उन सभी को मुक्त कराया। इस विजय के उपलक्ष्य में लोग दीप जलाकर खुशी मनाने लगे।
तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है।
Chhoti Diwali की पूजा विधि
Chhoti Diwali 2025 : छोटी दिवाली पर पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है –
- प्रातः स्नान:
सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करें। इसे “अभ्यंग स्नान” कहा जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। - दीप जलाना:
घर के मुख्य द्वार, आंगन और मंदिर में दीपक जलाएं। कहा जाता है कि इससे यम देव प्रसन्न होते हैं और मृत्यु भय समाप्त होता है। - भगवान कृष्ण और यम देव की पूजा:
इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा के साथ यमराज को दीप अर्पण करना शुभ माना जाता है। - नैवेद्य और मिठाई अर्पण:
पूजा के बाद घर के सदस्यों को प्रसाद बांटें और शुभकामनाएं दें।
Chhoti Diwali का धार्मिक महत्व
छोटी दिवाली केवल नरकासुर वध की याद में नहीं मनाई जाती, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
माना जाता है कि इस दिन दीप जलाने से घर में लक्ष्मी और यम देव दोनों की कृपा बनी रहती है।
साथ ही, यह दिन मनुष्य के अंदर की बुराइयों और नकारात्मक विचारों को मिटाने का भी संदेश देता है।
दिवाली और छोटी दिवाली का संबंध
छोटी दिवाली के अगले दिन मुख्य दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
जहां छोटी दिवाली पापों को नष्ट करने का प्रतीक है, वहीं बड़ी दिवाली मां लक्ष्मी के स्वागत का दिन है।
छोटी दिवाली को “अंधकार से प्रकाश की ओर पहला कदम” भी कहा जा सकता है।
इस दिन लोग अपने घरों की सफाई पूरी कर लेते हैं ताकि अगले दिन लक्ष्मी पूजा के लिए घर तैयार रहे।
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दिवाली 2025 की पूरी जानकारी
धनतेरस: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार)
छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजा): 21 अक्टूबर 2025 (मंगलवार)
गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर 2025 (बुधवार)
भाई दूज: 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)
इस प्रकार, दिवाली 2025 का पंचदिवसीय उत्सव 19 से 23 अक्टूबर तक चलेगा।
दिवाली मनाने का संदेश
दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने का नहीं, बल्कि मन के अंधकार को मिटाने का प्रतीक है।
छोटी दिवाली हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सत्य और धर्म की विजय निश्चित होती है।
इस दिन हमें अपने भीतर की ईर्ष्या, घृणा और नकारात्मक विचारों को दूर कर प्रेम, करुणा और सद्भाव का दीप जलाना चाहिए।
निष्कर्ष
छोटी दिवाली 2025 का त्योहार हमें आध्यात्मिक शुद्धता, आत्मविश्वास और प्रकाश की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देता है।
इस दिन भगवान कृष्ण और यमराज की पूजा करके हम अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आमंत्रित करते हैं।
तो इस वर्ष छोटी दिवाली पर अपने घर और मन दोनों को रोशनी से भर दें, ताकि आने वाली मुख्य दिवाली और भी ज्यादा शुभ और मंगलमय बन सके।